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Friday, May 8, 2020

कैंसर का सरल उपचार

भारत में लगभग 20 प्रतिशत लोग कैंसर के शिकार हैं।

राष्ट्रीय कैंसर संस्थान की रिपोर्ट के अनुसार देश में हर साल इस बीमारी से 90 हजार लोगों की मृत्यु हो जाती है। भारत में हर साल साढ़े बारह लाख नए रोगियों में से लगभग सात लाख महिलाएं होती हैं। 

आधुनिक जीवनशैली ने बढाया कैंसर का खतरा!

आधुनिक जीवनशैली, प्रदूषण और चारों तरफ बिखरा तनाव कुछ ऐसे कारण हैं जो कैंसर का जोखिम बढ़ाने में अपना योगदान देते हैैं। मनुष्य की मृत्यु के यूं तो कई अनगिनत कारण हैं जिनमें से एक महत्वपूर्ण कैंसर जैसा भंयकर रोग बना हुआ है।
कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक,” टिमोथी वील के अनुसार कैंसर शरीर की कोशिकाओं के विभाजन की प्रक्रिया का बेक़ाबू हो जाना है”। हमारे शरीर में कोशिकाओं के विभाजन में हमारे जीन का कंट्रोल होता है। जब कोई जीन किसी वजह से ये ज़िम्मेदारी नहीं निभा पाता तो कोशिकाओं के विभाजन की प्रक्रिया आउट ऑफ कंट्रोल हो जाती है।

बालीवुड और हालीवुड भी हुआ कैंसर से प्रभावित

रोटी, कपड़ा और मकान जैसी भौतिक ज़रूरतों के साथ जो सबसे अधिक ज़रूरी चीज़ है वह है मनुष्य का स्वस्थ शरीर। यदि शरीर ही नहीं रहेगा तो अन्य चीजें किस काम आएंगी। शरीर स्वस्थ रहेगा तो भौतिक जरूरतों को पूरा किया जा सकता है।

आध्यात्मिक ज्ञान से उपचार संभव


परमात्मा प्रत्येक युग में स्वयं या फिर अपने कृपा पात्र संत रूप में अपने निजधाम सतलोक से चलकर पृथ्वी पर आते हैं और अपनी प्यारी आत्माओं को मिलते हैं। परमात्मा अपने साधक की आयु भी बढ़ा सकता है और लाइलाज बीमारी भी ठीक कर देता है – ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 86 मंत्र 26.


संत रामपाल जी परमात्मा के कृपा पात्र और पूर्ण परोपकारी संत हैं जिनकी शरण में आने से लोग कैंसर जैसी भंयकर बीमारी से बिना कोई महंगी दवाई खाए, बिना कीमौथेरेपी, रेडियोथेरेपी, इम्यून थेरैपी कराए केवल आशीर्वाद मात्र से बिल्कुल ठीक हो चुके हैं। वह लोग जिनके पास डाक्टर की फीस भरने के भी पैसे नहीं थे केवल संत रामपाल जी से नाम दीक्षा लेकर और उनके द्वारा बताई भक्ति को पूर्ण विश्वास के साथ करने लगे और आज वह बिल्कुल स्वस्थ हैं।
वह संत नहीं जो चमत्कार दिखाए
और वह भी संत नहीं जिससे चमत्कार न हों।
संत रामपाल जी महाराज के द्वारा दिए जा रहे आध्यात्मिक ज्ञान को समझ कर जिसने भी संत जी से नाम दीक्षा ग्रहण की वो आज तन मन और धन तीनों से सुखी और स्वस्थ हैं। परमेश्वर से दूरी और उसके ज्ञान से अनभिज्ञता मनुष्य के दुखों का कारण होता है परंतु अब विश्व विकास, समृद्धि, स्वास्थ्य के लिए संत रामपाल जी महाराज की शरण ग्रहण कर रोग मुक्त होकर सतभक्ति आरंभ करेगा।